पाठ योजना | सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा | कार्य: प्रविष्टियाँ और निकास
| मुख्य शब्द | गणितीय फलन, इनपुट्स और आउटपुट्स, आत्म-ज्ञान, आत्म-नियंत्रण, जिम्मेदार निर्णय लेना, सामाजिक कौशल, सामाजिक जागरूकता, RULER विधि, भावनात्मक नियमन, माइंडफुलनेस, गणना, व्यावहारिक समस्याएँ |
| संसाधन | विभिन्न फलनों वाले कार्यपत्र, पेंसिल और इरेज़र, सफेद बोर्ड और मार्कर, घड़ी या टाइमर, चिंतन हेतु कागज, कंप्यूटर या टैबलेट (वैकल्पिक) |
| कोड | - |
| कक्षा | कक्षा 9 |
| विषय | ** गणित** |
उद्देश्य
अवधि: (10 - 15 मिनट)
इस सामाजिक-भावनात्मक पाठ योजना का हिस्सा छात्रों को फलनों के सिद्धांत से परिचित कराता है, जिससे वे इनपुट और आउटपुट के बीच के सम्बंध को समझ सकें। यह गणितीय आधार उनके पूर्व ज्ञान को निखारने के साथ-साथ नई गणना और समस्या समाधान की तकनीकों को सीखने में मदद करेगा, और साथ ही उन्हें अपनी भावनाओं को पहचानने और नियंत्रित करने के लिए प्रेरित करेगा।
उद्देश्य Utama
1. गणितीय फलनों की बुनियादी समझ विकसित करना, खासकर इनपुट और आउटपुट के बीच के संबंध पर जोर देना।
2. व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के माध्यम से फलनों के इनपुट और आउटपुट निकालने का कौशल सीखना।
परिचय
अवधि: (15 - 20 मिनट)
भावनात्मक वार्मअप गतिविधि
सचेत श्वास द्वारा ध्यान और वर्तमान में रहना
माइंडफुलनेस
1. छात्रों को आराम से कुर्सियों पर बैठने के लिए कहें, पैरों को जमीन पर मजबूती से टिकाएं और हाथ गोद में रखें।
2. यदि सहज लगे तो छात्रों को आंखें बंद करने या कमरे के किसी स्थिर बिंदु पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निर्देश दें।
3. मार्गदर्शन करें कि वे अपनी सांस पर ध्यान दें – नाक से गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे मुंह से छोड़ें।
4. उन्हें कल्पना करने को कहें कि हर सांस उनके शरीर में शांति भर रही है और हर छोड़ते समय तनाव दूर हो रहा है।
5. पांच से दस गहरी सांसों के चक्र के माध्यम से उन्हें सांस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करें।
6. अंत में, धीरे-धीरे आंखें खोलकर वापस कमरे की ओर ध्यान केंद्रित करने को कहें।
सामग्री का संदर्भ
गणितीय फलन की समझ हमारे दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी है। जैसे कि, अध्ययन के समय और शैक्षणिक प्रदर्शन के बीच के संबंध को समझना या थर्मोस्टैट द्वारा कमरे का तापमान नियंत्रित करना – ये सभी उदाहरण हमें फलनों की अवधारणा की झलक देते हैं। इस समझ से छात्र न केवल गणित में आगे बढ़ेंगे, बल्कि अपने जीवन में बेहतर और जिम्मेदार निर्णय भी ले सकेंगे।
विकास
अवधि: (60 - 75 मिनट)
सिद्धांत मार्गदर्शिका
अवधि: (20 - 25 मिनट)
1. फलन की परिभाषा: फलन दो समूहों के बीच ऐसा संबंध है कि पहले समूह (इनपुट) के हर तत्त्व का एक निश्चित संबंधित मान (आउटपुट) होता है। इसे f(x) के रूप में लिखा जाता है, जहाँ x इनपुट और f(x) आउटपुट है।
2. उदाहरण: f(x) = 2x + 3 पर विचार करें। यहाँ, x के हर मान के लिए, f(x) का एक संबंधित मान होता है। जैसे, यदि x = 2 है, तो f(2) = 2×2 + 3 = 7।
3. प्रतिनिधित्व के तरीके: फलन को सूत्र, तालिका और ग्राफ के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जिनके अपने-अपने फायदे होते हैं।
4. इनपुट और आउटपुट: इनपुट (डोमेन) x के सभी संभावित मानों का समूह है, जबकि आउटपुट (रेंज) f(x) के संभावित मानों का सेट है।
5. रेखीय और गैर-रेखीय फलन: रेखीय फलन सीधे रेखा द्वारा दर्शाये जाते हैं, जैसे f(x) = mx + b; वहीं, गैर-रेखीय फलन जैसे f(x) = x² वक्र बनाते हैं।
6. व्यावहारिक उपयोग: फलनों का उपयोग तापमान मापन, वित्तीय गणना, जनसंख्या वृद्धि और अन्य दैनिक क्रियाकलापों में किया जाता है।
सामाजिक-भावनात्मक प्रतिक्रिया के साथ गतिविधि
अवधि: (35 - 40 मिनट)
फलनों के इनपुट्स और आउटपुट्स निकालने का अभ्यास
इस गतिविधि का उद्देश्य गणितीय फलनों की अवधारणा को वास्तविक समस्याओं में लागू करना है, ताकि छात्र इनपुट और आउटपुट निकालने का व्यावहारिक अभ्यास कर सकें और साथ ही अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया पर भी ध्यान दे सकें।
1. छात्रों को चार-चार के समूहों में बाँटें।
2. प्रत्येक समूह को विभिन्न फलनों वाले कार्यपत्र दें, जिनमें रेखीय और गैर-रेखीय फलन शामिल हों।
3. प्रत्येक समूह को दिए गए इनपुट सेट के अनुसार आउटपुट निकालना होगा और इसके विपरीत भी करें।
4. समस्याएँ हल करने के बाद, समूहों से अपने समाधान साझा करने और अपनाई गई विधियों पर चर्चा करने को कहें।
5. गतिविधि के दौरान, छात्रों से आग्रह करें कि वे अपनी भावनाएँ – जैसे कि निराशा या संतोष – पहचानें और उनके बारे में चर्चा करें।
6. अंत में, प्रत्येक समूह से चर्चा करें कि उन्होंने समस्या हल करते समय अपनी भावनाओं का प्रबंधन कैसे किया और भविष्य में इसे और बेहतर कैसे कर सकते हैं।
चर्चा और समूह प्रतिक्रिया
RULER विधि को अपनाने के लिए, चर्चा की शुरुआत करते हुए छात्रों से पूछें कि उन्होंने गतिविधि के दौरान कौन सी भावनाएँ अनुभव कीं। उदाहरणार्थ: 'किसे निराशा महसूस हुई? किसे संतोष?' फिर, उन भावनाओं के कारणों पर विचार-विमर्श करें। छात्रों को स्पष्ट रूप से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कहें, जैसे 'चिंतित', 'आत्मविश्वासी', या 'चुनौतीपूर्ण महसूस करना'। अंत में, उन्हें गहरी साँस लेने, विराम लेने और एक-दूसरे के समर्थन जैसी तकनीकों का सुझाव दें, जिससे भावनाओं का बेहतर प्रबंधन हो सके।
निष्कर्ष
अवधि: (15 - 20 मिनट)
प्रतिबिंब और भावनात्मक विनियमन
छात्रों से आग्रह करें कि वे एक पैराग्राफ लिखें जिसमें वे पाठ के दौरान आई चुनौतियों और अपनी भावनाओं के प्रबंधन पर विचार करें। वैकल्पिक रूप से, समूह चर्चा का आयोजन करें जहाँ प्रत्येक छात्र अपने अनुभव साझा कर सके। पूछें: 'आपके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण पल कौन से थे? कैसा महसूस हुआ? आपने क्या किया?'
उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य आत्म-विश्लेषण और भावनात्मक नियंत्रण को बढ़ावा देना है, जिससे छात्र चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ अपना सकें।
भविष्य की झलक
पाठ समाप्त करते समय, छात्रों को सुझाव दें कि वे सीखी गई सामग्री से जुड़े व्यक्तिगत और शैक्षणिक लक्ष्य निर्धारित करें। समझाएं कि ये लक्ष्य विशिष्ट, मापने योग्य और प्राप्त करने योग्य होने चाहिए। जैसे कि, 'अगले सप्ताह प्रतिदिन 30 मिनट फंक्शन के इनपुट और आउटपुट का अभ्यास करना', या 'गणित अध्ययन से पहले सचेत श्वास तकनीक का अभ्यास करना'।
Penetapan उद्देश्य:
1. प्रतिदिन फंक्शन के इनपुट और आउटपुट का अभ्यास करें।
2. पाठ्य सामग्री का साप्ताहिक पुनरावलोकन करें।
3. समूह चर्चाओं में सक्रियता से हिस्सा लें।
4. चुनौतीपूर्ण गतिविधियों से पहले माइंडफुलनेस तकनीकों का अभ्यास करें।
5. गणितीय अवधारणा को समझने में कठिनाई हो तो समय रहते मदद लें। उद्देश्य: इस उपखंड का उद्देश्य छात्रों की स्वावलंबिता और व्यावहारिक सीख को सुदृढ़ करना है, ताकि वे शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास में निरंतरता बनाए रख सकें। स्पष्ट और यथार्थवादी लक्ष्य स्थापित करके, उन्हें अधिगम प्रक्रिया में केंद्रित और प्रेरित रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।