पाठ योजना | सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा | शहरी नृत्य
| मुख्य शब्द | शहरी नृत्य, शारीरिक शिक्षा, स्वतंत्रता, रचनात्मकता, अभिव्यक्तित्व, गति, आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, जिम्मेदार निर्णय, सामाजिक कौशल, सामाजिक जागरूकता, RULER पद्धति, हिप हॉप, ब्रेकडांस, पोपिन', लॉकिन', क्रम्पिंग, वोगिंग, वैकिंग, फ्रीस्टाइल |
| संसाधन | नृत्य के लिए खुला स्थान, मोबाइल उपकरण (स्मार्टफोन या टैबलेट) इंटरनेट कनेक्शन सहित, ध्वनि प्रणाली, विभिन्न संगीत शैलियाँ, विचारों के लेखन हेतु कागज और पेन, शहरी नृत्यों पर शोध सामग्री (पुस्तकें, लेख आदि), सजगता अभ्यास के लिए कुर्सियाँ या चटाई |
| कोड | - |
| कक्षा | कक्षा 6 |
| विषय | शारीरिक शिक्षा |
उद्देश्य
अवधि: (10 - 15 मिनट)
इस पाठ का उद्देश्य छात्रों को कक्षा में खोजे जाने वाले विषय की स्पष्ट समझ प्रदान करना है। इसमें मुख्य शहरी नृत्य शैलियों और उनके मौलिक पहलुओं पर रोशनी डाली जाएगी, जैसे कि स्वतंत्रता, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति और गति। इन तत्वों को समझकर छात्र प्रायोगिक गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले सकेंगे और अपने सामाजिक-भावनात्मक कौशल को नृत्य के माध्यम से विकसित कर सकेंगे।
उद्देश्य Utama
1. मुख्य शहरी नृत्य शैलियों, उनके गुणों एवं मूल विचारों की पहचान करना और समझना।
2. शहरी नृत्य की गतियों के माध्यम से रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ावा देना।
3. शहरी नृत्यों में व्यक्त होने वाली स्वतंत्रता की भावना को समझना और सराहना करना।
परिचय
अवधि: (15 - 20 मिनट)
भावनात्मक वार्मअप गतिविधि
सचेत श्वास
श्वासों पर ध्यान केंद्रित करते हुए सजगता अभ्यास
1. छात्रों से निवेदन करें कि वे कुर्सियों या फर्श पर आराम से बैठ जाएं, अपनी रीढ़ सीधी रखें और पैरों को अच्छी तरह से जमीन पर टिकाएं।
2. बता दें कि यह गतिविधि श्वास पर ध्यान केन्द्रित करने वाला सजगता अभ्यास है, जो वर्तमान क्षण में उपस्थित रहने में मदद करता है।
3. छात्रों से कहें कि धीरे-धीरे अपनी आँखें बंद करें या सामने स्थित किसी निश्चित बिंदु पर आरामदायक नज़र बनाए रखें।
4. उन्हें अपने पेट और छाती पर हाथ रखकर श्वास की हर प्रक्रिया को महसूस करने के लिए कहें।
5. छात्रों को धीरे-धीरे नाक से गहरी साँस लेने और मुँह से धीरे-धीरे छोड़ने के निर्देश दें, जिससे पेट की गति महसूस हो।
6. लगभग 5 मिनट तक इस गहरी श्वास प्रक्रिया को दोहराने को कहें, ध्यान में श्वास के अनुभवों पर केंद्रित रहते हुए।
7. यदि ध्यान भटकता दिखे, तो उन्हें बिना निर्णय किए धीरे-धीरे श्वास पर पुनः फोकस करने के लिए प्रेरित करें।
8. अभ्यास समाप्त होने पर, धीरे-धीरे आँखें खोलने और हल्की स्ट्रेचिंग करने के निर्देश दें ताकि शरीर फिर से सजग हो सके।
सामग्री का संदर्भ
शहरी नृत्य केवल पूर्व-निर्धारित आंदोलनों का समूह नहीं हैं; ये व्यक्तिगत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम हैं। प्रत्येक शहरी नृत्य का एक समृद्ध इतिहास होता है, जो भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने का जरिया बन जाता है। उदाहरण के लिए, ब्रेकडांसिंग न्यूयॉर्क की सड़कों से शुरू हुई थी और यह दृढ़ इच्छाशक्ति तथा रचनात्मकता का प्रतीक बन गई। इन शैलियों के अध्ययन से छात्र न केवल शारीरिक कुशलता में सुधार करेंगे, बल्कि सांस्कृतिक विविधता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के महत्व को भी समझ पाएंगे।
इसके अलावा, शहरी नृत्य का अभ्यास छात्रों को आत्म-जागरूकता और आत्म-नियंत्रण विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। इन गतियों में लिप्त होकर छात्र अपनी भावनाओं और उनके प्रकट होने के तरीकों को समझने का अवसर पाते हैं। इस प्रकार का अभ्यास कक्षा में एक समावेशी और भावनात्मक रूप से जागरूक वातावरण बनाने में मदद करता है, जहाँ हर छात्र की अहमियत को समझा जाता है।
विकास
अवधि: (60 - 75 मिनट)
सिद्धांत मार्गदर्शिका
अवधि: (25 - 30 मिनट)
1. शहरी नृत्य के मुख्य तत्व:
2. हिप हॉप: यह एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन है जिसमें डीजेइंग, ग्रैफिटी, और नृत्य शामिल हैं। हिप हॉप नृत्य अपनी नवीनता और स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध हैं।
3. ब्रेकडांस: इसे बी-बॉइंग या बी-गर्लिंग भी कहा जाता है। यह शैली न्यूयॉर्क के ब्रोंक्स क्षेत्र में अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय द्वारा विकसित की गई है और इसमें एक्रोबैटिक तथा फर्श आधारित गतियाँ शामिल हैं।
4. पोपिन': इसमें मांसपेशियों का तेज़ी से संकुचन और अचानक छूट शामिल होती है, जिससे शरीर में 'पॉप' का अनुभव होता है।
5. लॉकिन': यह शैली तेज़, स्पष्ट गतियों के साथ नाटकीय विराम और मुद्राओं को जोड़ती है।
6. क्रम्पिंग: एक ऊर्जावान और अभिव्यक्तिपूर्ण नृत्य शैली जो तीव्र भावनाओं को प्रकट करने का माध्यम है।
7. वोगिंग: वोग पत्रिका में देखी गई मुद्राओं से प्रेरित यह एक प्रदर्शनकारी शैली है जिसमें विशिष्ट नाटकीय मुद्राओं और गतियों का समावेश है।
8. वैकिंग: इसमें तेज, घुमावदार बांहों की गतियाँ होती हैं, जो विशेषकर डिस्को संगीत की धुन पर की जाती हैं।
9. फ्रीस्टाइल: यह शहरी नृत्य का मूल सार है, जहाँ व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को सर्वोपरि माना जाता है।
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11. मुख्य अवधारणाएँ:
12. स्वतंत्रता: शहरी नृत्य मंच पर नर्तकों को अपनी भावनाओं तथा व्यक्तिगत कहानियों को स्वतंत्र रूप से प्रकट करने का अवसर देते हैं।
13. रचनात्मकता: विद्यार्थियों को अपनी अनूठी शैलियों और गतियों को विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।
14. अभिव्यक्तित्व: यह नृत्य भावनाओं और विचारों के संप्रेषण का एक प्रभावशाली माध्यम है।
15. गति: नृत्य के माध्यम से शरीर पर नियंत्रण और प्रवाह को व्यक्त करना महत्वपूर्ण है।
सामाजिक-भावनात्मक प्रतिक्रिया के साथ गतिविधि
अवधि: (35 - 40 मिनट)
शहरी नृत्य की विविध गतियों की खोज
इस गतिविधि में, छात्रों को छोटे समूहों में बांटकर एक-एक शहरी नृत्य शैली का चयन करने के लिए कहा जाएगा, जिसे वे खोज और प्रस्तुत करेंगे। उन्हें स्वतंत्रता, रचनात्मकता, अभिव्यक्तित्व और गति के तत्वों को शामिल करते हुए एक छोटी कोरियोग्राफी तैयार करनी होगी। प्रस्तुति के पश्चात्, समूह चर्चा के दौरान अपने अनुभव एवं भावनाओं पर विचार विमर्श किया जाएगा।
1. छात्रों को 4-5 व्यक्तियों के समूहों में बाँटें।
2. प्रत्येक समूह एक शहरी नृत्य शैली (हिप हॉप, ब्रेकडांस, पोपिन', लॉकिन', क्रम्पिंग, वोगिंग, वैकिंग, फ्रीस्टाइल) का चयन करें।
3. समूह अपने चुने हुए शैली पर संक्षिप्त जानकारी एकत्रित करें, इसके लिए मोबाइल, इंटरनेट या शिक्षक द्वारा प्रदान की गई सामग्री का उपयोग करें।
4. समूह को स्वतंत्रता, रचनात्मकता, अभिव्यक्तित्व और गति के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए 1 से 2 मिनट की कोरियोग्राफी तैयार करनी होगी।
5. कोरियोग्राफी तैयार करने के लिए समूह को 20-25 मिनट का समय दें।
6. तैयारी पूर्ण होने पर, प्रत्येक समूह अपनी कोरियोग्राफी कक्षा में प्रस्तुत करेगा।
7. प्रत्येक प्रस्तुति के बाद, छात्रों के अनुभव और भावनाओं पर चर्चा की जाएगी।
चर्चा और समूह प्रतिक्रिया
समूह चर्चा में RULER पद्धति को अपनाने के लिए, छात्रों से यह पूछें कि गतिविधि के दौरान उन्होंने कौन से भाव अनुभव किए। पूछें: 'कोरियोग्राफी तैयार करते और प्रस्तुत करते समय आपने कैसा महसूस किया?' छात्रों को अपने अनुभवों को खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित करें, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक।
फिर, उनसे यह जानने का प्रयास करें कि किस कारण उन्होंने ऐसे अनुभव किए। पूछें: 'आपको क्यों लगता है कि ऐसा महसूस हुआ?' इससे उन्हें उन कारणों को समझने में मदद मिलेगी, जैसे 'बेचैनी', 'उत्साह' या 'नर्वसनेस'।
छात्रों को अपनी भावनाओं को उपयुक्त ढंग से व्यक्त करने और दूसरों की भावनाओं का सम्मान बनाने हेतु प्रेरित करें। अंत में, भावनाओं को सही ढंग से नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा करें, जिससे आगे के अनुभव बेहतर बने। पूछें: 'अगली बार आप अधिक आत्मविश्वास के साथ और कम नर्वस महसूस करने के लिए क्या कर सकते हैं?' यह दृष्टिकोण छात्रों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामाजिक समझदारी को बढ़ावा देगा।
निष्कर्ष
अवधि: (15 - 20 मिनट)
प्रतिबिंब और भावनात्मक विनियमन
छात्रों से आग्रह करें कि वे कक्षा के दौरान आई चुनौतियों पर संक्षिप्त विचार व्यक्त करें या समूह चर्चा में हिस्सा लें। उनसे पूछें कि शहरी नृत्य की विभिन्न शैलियों को सीखते और प्रस्तुत करते समय उन्हें कैसा अनुभव हुआ। साथ ही, यह जानने का प्रयास करें कि उन्होंने अपनी भावनाओं को कैसे संभाला और शांत, आत्मविश्वासी रहने के लिए क्या रणनीतियाँ अपनाईं। यह गतिविधि लिखित या मौखिक रूप से की जा सकती है, छात्र की सुविधा तथा पसंद के अनुसार।
उद्देश्य: इस भाग का उद्देश्य छात्रों को आत्म-मूल्यांकन करने और भावनाओं के नियंत्रण के कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। कक्षा के दौरान आई चुनौतियों और भावनाओं पर विचार करके छात्र, भविष्य में बेहतर रणनीतियाँ अपना सकेंगे। यह आत्म-जागरूकता एवं आत्म-नियंत्रण में सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा, जो सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए आवश्यक है।
भविष्य की झलक
छात्रों को समझाएं कि कक्षा में सीखी गयी सामग्री से जुड़े व्यक्तिगत और शैक्षणिक लक्ष्य निर्धारित करना क्यों महत्वपूर्ण है। उनसे पूछें कि शहरी नृत्य से मिले अनुभवों के आधार पर वे कोई व्यक्तिगत और कोई शैक्षणिक लक्ष्य तय करें, जैसे कि सार्वजनिक प्रस्तुति में आत्मविश्वास बढ़ाना या किसी विशेष शहरी नृत्य शैली का गहन अध्ययन करना। उन्हें अपने लक्ष्य कक्षा में साझा करने के लिए प्रेरित करें, जिससे सहयोग की भावना और एक-दूसरे का सम्मान बढ़े।
Penetapan उद्देश्य:
1. सार्वजनिक प्रस्तुति में अधिक आत्मविश्वासी बनना।
2. विशिष्ट शहरी नृत्य शैली का गहन अध्ययन करना।
3. सीखी गई अवधारणाओं के आधार पर एक मौलिक कोरियोग्राफी तैयार करना।
4. स्कूल या सामुदायिक नृत्य कार्यक्रम में हिस्सा लेना।
5. विभिन्न शहरी नृत्यों के इतिहास और संस्कृति को समझना। उद्देश्य: इस भाग का उद्देश्य छात्रों में स्वायत्तता को सुदृढ़ करना और सीखी गयी बातों के व्यावहारिक प्रयोग की प्रेरणा देना है। व्यक्तिगत तथा शैक्षणिक लक्ष्य निर्धारित करने से छात्र अपनी क्षमताओं को निरंतर विकसित कर सकेंगे और भविष्य में स्वावलंबी तथा आत्मविश्वासी बनेंगे।