पाठ योजना | सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा | कला: सामाजिक आलोचना
| मुख्य शब्द | कला, सामाजिक आलोचना, सामाजिक आंदोलनों, RULER, आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, जिम्मेदार निर्णय, सामाजिक कौशल, सामाजिक जागरूकता, माइंडफुलनेस, भावनाएँ, कलात्मक अभिव्यक्ति, सामाजिक-भावनात्मक प्रतिक्रिया, चिंतन, व्यक्तिगत लक्ष्य |
| संसाधन | आरामदायक कुर्सियाँ, ध्यान का उपयुक्त स्थान, चित्रण सामग्री (कागज, पेंसिल, रबड़), पेंटिंग सामग्री (रंग, ब्रश, पैलेट), मूर्तिकला सामग्री (मिट्टी, मॉडलिंग उपकरण), पोस्टर बोर्ड और मार्कर्स, कंप्यूटर या टैबलेट (शोध के लिए), प्रोजेक्टर या टीवी (सामाजिक आलोचना कला के उदाहरण दिखाने हेतु), व्हाइटबोर्ड और मार्कर्स, Banksy, Ai Weiwei और अन्य प्रसिद्ध कलाकारों के कार्यों के प्रिंट, नोट्स रखने के लिए नोटपैड, लिखित प्रतिबिंबों के लिए कागज की शीट्स |
| कोड | - |
| कक्षा | कक्षा 12 |
| विषय | **कला ** |
उद्देश्य
अवधि: 10 - 15 मिनट
इस चरण का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि कला किस प्रकार सामाजिक आलोचना और आंदोलनों का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। इससे छात्र कक्षा की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर आत्म-जागरूकता, सामाजिक जागरूकता, और सामाजिक कौशल विकसित करेंगे, साथ ही आलोचनात्मक कला की रचना और व्याख्या करते समय उत्पन्न भावनाओं की पहचान एवं समझ पायेंगे।
उद्देश्य Utama
1. समझाएं कि कैसे कला का उपयोग समाज के विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डालने के लिए किया जा सकता है, और इसमें प्रयुक्त विशिष्ट कलात्मक उपकरणों का अन्वेषण करें।
2. दो ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलनों का विश्लेषण करें और उन संदर्भों में कला की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार करें।
परिचय
अवधि: (15 - 20 मिनट)
भावनात्मक वार्मअप गतिविधि
माइंडफुलनेस: वर्तमान में होशियार रहना
माइंडफुलनेस ध्यान की एक ऐसी तकनीक है जो हमें वर्तमान क्षण में रहने, एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक शांति पाने में मदद करती है। इस गतिविधि के दौरान, छात्रों को उनके श्वास और शारीरिक संवेदनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है, जिससे तनाव में कमी और मानसिक स्पष्टता आती है।
1. छात्रों से कहें कि वे आरामदायक ढंग से अपनी कुर्सियों पर बैठें, पैरों को फर्श से स्पर्श में रखें और हाथ गोद में रखें।
2. उन्हें सुझाव दें कि या तो आँखें बंद करें या सामने स्थित किसी एक बिंदु पर हल्की नजर बनाए रखें।
3. छात्रों से निर्देश दें कि वे अपने श्वास पर ध्यान दें, बिना किसी संशोधन के, बस धीरे-धीरे अंदर जाने और बाहर निकलने वाली हवा को महसूस करें।
4. सुझाव दें कि श्वास लेते समय चार तक गिनें और श्वास छोड़ते समय भी चार तक गिनें, इस चक्र को कुछ मिनटों तक दोहराएं।
5. अगर छात्रों का मन भटके तो उन्हें विनम्रतापूर्वक निर्देश दें कि वे फिर से अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करें, बिना कोई निर्णय किए।
6. कुछ मिनटों के बाद, छात्रों को अपने ध्यान को अपने शरीर की संवेदनाओं की ओर मोड़ने का आग्रह करें और महसूस करें कि उनके शरीर के विभिन्न हिस्सों में तनाव या आराम कैसा है।
7. अंत में, विस्तार से सांगत करें कि छात्रों धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलें और कक्षा की ओर लौट आएँ ताकि वे आगामी गतिविधि के लिए तैयार हो सकें।
सामग्री का संदर्भ
इतिहास में कला ने हमेशा समाज में व्याप्त मुद्दों पर सवाल उठाने और परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का कार्य किया है। पुनर्जागरण और आधुनिकतावाद जैसे आंदोलनों में कला ने सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक मानदंडों को चुनौती देने का प्रयास किया। Banksy और Ai Weiwei जैसे कलाकार वर्तमान समय में सामाजिक असमानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दों पर अधिक जोर देते हुए इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कला की वह क्षमता, जो भावनाओं को जगाने और विचारों को प्रेरित करने में सक्षम है, इसे सामाजिक आलोचना का एक बेहद प्रभावशाली माध्यम बनाती है।
विकास
अवधि: 60 - 75 मिनट
सिद्धांत मार्गदर्शिका
अवधि: 20 - 25 मिनट
1. सामाजिक आलोचना के रूप में कला की परिभाषा: समझाएं कि कैसे कला समाज में व्याप्त सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रकाश डालने का एक शक्तिशाली साधन बन सकती है। Banksy और Ai Weiwei के कार्यों सहित ऐतिहासिक तथा समकालीन उदाहरण प्रस्तुत करें।
2. सामाजिक आंदोलनों और कला का सम्बंध: दो प्रमुख ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलनों का विवरण दें एवं यह स्पष्ट करें कि उन आंदोलनों में कला का किस प्रकार से योगदान रहा। उदाहरणस्वरूप, पुनर्जागरण ने धार्मिक और सामाजिक मानदंडों को चुनौती दी, जबकि आधुनिकतावाद ने परंपरागत रीतियों को तोड़ते हुए नवाचार को बढ़ावा दिया।
3. सामाजिक आलोचना हेतु कलात्मक उपकरण: उन विभिन्न उपकरणों और तकनीकों का वर्णन करें जिन्हें कलाकार समाज की आलोचना के लिए अपनाते हैं। इसमें पेंटिंग, मूर्तिकला, प्रदर्शन कला, ग्रैफिटी और डिजिटल कला शामिल हैं।
4. सामाजिक आलोचना में भावनाओं की भूमिका: चर्चा करें कि कैसे कला, सामाजिक आलोचना के दौरान दर्शकों में गहरी भावनाएँ उत्पन्न कर सकती है। छात्रों को RULER पद्धति के जरिए इन भावनाओं की पहचान, समझ, लेबलिंग, व्यक्त एवं नियंत्रित करने में मदद करें।
5. सामाजिक आलोचना में कला का प्रभाव: विश्लेषण करें कि कैसे कला सार्वजनिक राय को प्रभावित कर और सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरित कर सकती है। पिकासो की 'Guernica' जैसी कृतियों के उदाहरण से समझाएं कि कैसे युद्ध और अन्य सामाजिक मुद्दों पर संदेश दिया जा सकता है।
सामाजिक-भावनात्मक प्रतिक्रिया के साथ गतिविधि
अवधि: 35 - 40 मिनट
सामाजिक आलोचना पर आधारित अपनी कलाकृति तैयार करें
छात्र एक ऐसी कलाकृति बनाएंगे जो उनके लिए महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे को दर्शाती हो। इसमें वे कक्षा में चर्चा किए गए सिद्धांतों, उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर अपनी भावनाओं और विचारों को रूपांतरित करेंगे।
1. छात्रों को 3 से 4 के छोटे समूहों में बाँटें।
2. प्रत्येक समूह को एक ऐसा सामाजिक मुद्दा चुनना है जो उन्हें प्रासंगिक लगे, जैसे असमानता, मानवाधिकार या पर्यावरण इत्यादि।
3. समूह में चर्चा करें कि चुना गया मुद्दा उन पर कैसे असर डालता है और इससे कौन सी भावनाएँ उत्पन्न होती हैं। इस प्रक्रिया के लिए RULER पद्धति का सहारा लें।
4. प्रत्येक समूह एक कला कृति का प्रारूप तैयार करें जो उस सामाजिक मुद्दे की आलोचना प्रस्तुत करे। वे किसी भी कलात्मक माध्यम (पेंटिंग, मूर्तिकला, प्रदर्शन कला आदि) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
5. उपलब्ध सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुए, प्रत्येक समूह अपने कला कार्य का मॉडल या प्रोटोटाइप तैयार करें।
6. निर्माण पूरा होने के बाद, प्रत्येक समूह अपने कार्य को कक्षा में प्रस्तुत करे, जिसमें वे संबंधित सामाजिक मुद्दे, जगी भावनाओं और संदेश का विवरण साझा करें।
चर्चा और समूह प्रतिक्रिया
कलात्मक प्रस्तुतियों के पश्चात RULER पद्धति का उपयोग करते हुए समूह चर्चा करें। छात्रों से कहें कि वे अपने साथियों के काम में प्रकट हुई भावनाओं की पहचान करें, उनके कारणों एवं प्रभावों को समझें, उपयुक्त लेबलिंग करें तथा सम्मानपूर्वक व्यक्त करें। अंत में, इस बात पर चर्चा करें कि कला रचना और प्रस्तुतिकरण के दौरान इन भावनाओं को नियंत्रित रखने के क्या-क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
अवधि: 15 - 20 मिनट
प्रतिबिंब और भावनात्मक विनियमन
छात्रों से अनुरोध करें कि वे अपनी बनाई गई सामाजिक आलोचना कृतियों के दौरान सामने आई चुनौतियों पर संक्षेप में लिखें। उनसे यह भी पूछें कि इस प्रक्रिया में उन्होंने अपनी भावनाओं को RULER पद्धति के तहत (पहचान, समझ, लेबलिंग, व्यक्तिकरण और नियंत्रण) कैसे संभाला। इसके पश्चात, एक समूह चर्चा आयोजित करें जहाँ छात्र अपने अनुभव साझा कर सकें और एक दूसरे से सीख सकें।
उद्देश्य: इस उपखंड का उद्देश्य आत्म-मूल्यांकन और भावनात्मक नियंत्रण को बढ़ावा देने का है, ताकि छात्र मुश्किल परिस्थितियों में भी उचित रणनीतियाँ अपना सकें। अपने अनुभवों पर विचार-विमर्श करके वे आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण तथा सहानुभूति जैसी क्षमताओं को विकसित करते हैं और सामाजिक-भावनात्मक सीख को अपने दैनिक जीवन में उतारते हैं।
भविष्य की झलक
छात्रों को यह समझाएं कि व्यक्तिगत और शैक्षिक लक्ष्यों का निर्धारण क्यों महत्वपूर्ण है, ताकि कक्षा में शुरू की गई विकास प्रक्रिया निरंतर बनी रहे। उन्हें प्रेरित करें कि वे ऐसे ठोस लक्ष्य स्थापित करें जिनमें कला के माध्यम से सामाजिक आलोचना और सीखे गए सामाजिक-भावनात्मक कौशल का अभ्यास शामिल हो। ये लक्ष्य नए कला कार्यों, सामुदायिक परियोजनाओं या सामाजिक एवं कलात्मक आंदोलनों पर गहन शोध से संबंधित हो सकते हैं।
Penetapan उद्देश्य:
1. एक नई कला कृति बनाएं जो किसी प्रासंगिक सामाजिक मुद्दे को दर्शाती हो।
2. ऐसी सामुदायिक परियोजना में भाग लें जो कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित हो।
3. उस सामाजिक आंदोलन या कलाकार के बारे में विस्तार से शोध करें जो कला का सामाजिक आलोचना के रूप में उपयोग करता है।
4. दैनिक जीवन में आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण आदि सीखे गए सामाजिक-भावनात्मक कौशल का अभ्यास करें।
5. अपने कला कार्यों और प्रतिबिंबों को डिजिटल प्लेटफार्म या स्कूल प्रदर्शनी में साझा करें। उद्देश्य: इस भाग का उद्देश्य छात्रों की स्वायत्तता को बढ़ाना और सीखे गए कौशल को व्यावहारिक रूप से अपनाने में मदद करना है, जिससे वे शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास को निरंतर आगे बढ़ा सकें।